कुछ बातें जो कभी राह चलते तो कभी तन्हा बैठे दिल में घुमड़ती रहती है.. जब भी मन करता है अपनी कलम से कोरे कागज़ को रंगना शुरू कर देता हूँ... ऐसे में ही कभी अपनों की तो कभी अनजानी प्रशंसा ने इतना विवश किया कि ये सब blog के माध्यम से आपके सामने चित्रित हो खड़ी है...
Sunday, August 29, 2010
वो हसीन "स्वप्ना "
Sunday, August 15, 2010
स्वतंत्रता दिवस
Friday, August 13, 2010
Happy Birthday SUNIDHI JI...
Monday, July 19, 2010
बहका मन...
मैं थोड़ा बैचेन सा, कभी परेशान सा, उसे इस धरा पर खोजता हूँ.. और वो मुझे देख के हंसा करती है...!!
मैं धागा बन, उसे पतंग बना आसमां में उड़ना चाहता हूँ,. और वो किसी के मांझे से कट जाया करती है...!!
Wednesday, July 14, 2010
रिमझिम रूह..
Sunday, April 4, 2010
माँ की याद..
Monday, February 8, 2010
A Wedding Wish for "RAINA DIDI" :- "दुल्हन"
झरने जैसी खिलखिलाती हंसी, आज खामोश सी है,
लोगों की भीडभाड़ से दूर, वो सहमी सी है..
आज तक जिन हाथों ने, इस घर को सजाया था,
देखो उसके हाथों में, आज मेहंदी सजी है...
सखियाँ उस दुल्हन को, गहनों से छुपा रही है,
वो आईने में बैठ कर, खुद को निहार रही है..
नथ और झुमकों से दमकता, चेहरा भी आज चाँद बना है,
"रैना" अपने झील से नैना, काज़ल से बाँध रही है...
बचपन से संजोये थे, किसी राजकुमार के सपने,
वो संग उसी के, नयी दुनिया बसाने जा रही है..
सात जन्मो का रिश्ता, उस से बाँध कर,
वो बाबुल का घर, छोड़कर जा रही है...
जश्न के इस मौके पर, सजदा मकबूल-ऐ-खुदा हो जाये,
सबकी दुआओं को, रब की रजा हो जाये..
मिले दामन में इतनी खुशियाँ कि,
हजारों साल तक गम तुझसे खफा हो जाये..
Wednesday, December 30, 2009
"कुछ अनकही..."
Wednesday, November 4, 2009
BirthDay wish for VIPUL
कहते है, लोग बिन बताये दिल में पनाह ले लेते है,
कुछ खास होते है जो कोने में छुप के बैठ जाते है...
पनाहगाह
अब्बू कहा करते थे,
आँखों की बरसात बचा के रखना,
लोग आग लगाना नहीं भूले हैं,
पर उस बरसात से ज्वालामुखी को,
चाहूँ तो भी बुझाऊँ कैसे...
दिल में चुभ रही थी एक कील,
दर्द सहना हो रहा था मुश्किल,
हाथ विद्रोही बन बैठे,
आक्रोश और द्वेष उसका साथ दे बैठे,
ना रोक सका उस प्यासे खंजर को,
जो मास्टर के बदन को छ्लनी कर बैठे...
अजनबीयों के शहर में,
अपना ही वजूद अजनबी लगने लगा,
जोकर का मुखौटा पहने आईने में,
खुद को पहचानने की कोशिश करने लगा,
आया था चेहरा छुपाने, पर
चेहरे ने ही दिया अनजाना करार...
जैसा किया वैसा पाया,
अब ना है किसी सुख की चाह,
ये एक सर्कस नहीं,
पनाहगाह है, पनाहगाह...!!!





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